अवतल दर्पण के द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना (Image formed by Concave Mirror)
जब वस्तु अनन्त पर हो
इस स्थिति में, हम वस्तु से चलने वाली दो किरणों पर विचार करते है जो कि मुख्य अक्ष के समान्तर चलती है। जब ये किरणें दर्पण के परावर्तक तल से टकराती है तो टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर दर्पण के मुख्य फोकस (F) पर आकर मिलती (या अभिसरित) होती है। इस प्रकार ये किरणें दर्पण के मुख्य फोकस (F) पर वस्तु के प्रतिबिम्ब का निर्माण करती है जो कि अत्यधिक छोटा, बिन्दु आकार का, वास्तविक और उल्टा बनता है।

जब वस्तु वक्रता केन्द्र (C) से दूर हो
इस स्थिति में, हम वस्तु से चलने वाली दो किरणों पर विचार करते है जिनमें एक मुख्य अक्ष के समान्तर चलती है जबकि दूसरी दर्पण के वक्रता केन्द्र (C) से होकर गुजरती है। जब ये किरणें दर्पण के परावर्तक तल से टकराती है तो टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर दर्पण के मुख्य फोकस (F) और वक्रता केन्द्र (C) के बीच वस्तु के प्रतिबिम्ब का निर्माण करती है जो कि छोटा, वास्तविक और उल्टा बनता है।

जब वस्तु वक्रता केन्द्र (C) पर हो
इस स्थिति में, हम वस्तु से चलने वाली दो किरणों पर विचार करते है जिनमें एक मुख्य अक्ष के समान्तर चलती है जबकि दूसरी दर्पण के मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरती है। जब ये किरणें दर्पण के परावर्तक तल से टकराती है तो टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर दर्पण के वक्रता केन्द्र (C) पर वस्तु के प्रतिबिम्ब का निर्माण करती है जो कि समान आकार का, वास्तविक और उल्टा बनता है।

जब वस्तु वक्रता केन्द्र (C) और मुख्य फोकस (F) के बीच हो
इस स्थिति में, हम वस्तु से चलने वाली दो किरणों पर विचार करते है जिनमें एक मुख्य अक्ष के समान्तर चलती है जबकि दूसरी दर्पण के मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरती है। जब ये किरणें दर्पण के परावर्तक तल से टकराती है तो टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर दर्पण के वक्रता केन्द्र (C) से कुछ दूरी पर वस्तु के प्रतिबिम्ब का निर्माण करती है जो कि बड़ा (विवर्धित), वास्तविक और उल्टा बनता है।

जब वस्तु मुख्य फोकस (F) पर हो
इस स्थिति में, हम वस्तु से चलने वाली दो किरणों पर विचार करते है जिनमें एक मुख्य अक्ष के समान्तर चलती है जो दर्पण के परावर्तक तल से टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरती है जबकि दूसरी दर्पण के परावर्तक तल पर इस प्रकार टकराती है मानो वह पहले वक्रता केन्द्र (C) से होकर गुजरी हो और टकराने के पश्चात् उसी मार्ग में वापस लौट जाती है। जब ये किरणें दर्पण के परावर्तक तल से टकराती है तो टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर एक दूसरे के समान्तर चलकर दर्पण से अनन्त दूरी पर वस्तु के प्रतिबिम्ब का निर्माण करती है जो कि असीमित रूप से बड़ा (अत्यधिक विवर्धित), वास्तविक और उल्टा बनता है।

जब वस्तु मुख्य फोकस (F) और ध्रुव (P) के बीच हो
इस स्थिति में, हम वस्तु से चलने वाली दो किरणों पर विचार करते है जिनमें एक मुख्य अक्ष के समान्तर चलती है जो दर्पण के परावर्तक तल से टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरती है जबकि दूसरी दर्पण के परावर्तक तल पर इस प्रकार टकराती है मानो वह पहले वक्रता केन्द्र (C) से होकर गुजरी हो और टकराने के पश्चात् उसी मार्ग में वापस लौट जाती है। जब ये किरणें दर्पण के परावर्तक तल से टकराती है तो टकराने के पश्चात् ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों परावर्तित किरणें किसी बिन्दु से फैल (या अपसरित) हो रही है अर्थात् वे पहले किसी बिंदु पर मिली होंगी और इनके द्वारा वस्तु के प्रतिबिम्ब का निर्माण होता है जो दर्पण के पीछे बड़ा (विवर्धित), आभासी और सीधा बनता है।

वस्तु की स्थिति |
प्रतिबिम्ब की स्थिति |
प्रतिबिम्ब का आकार |
प्रतिबिम्ब की प्रकृति |
| अनन्त पर | मुख्य फोकस (F) पर | अत्यधिक छोटा, बिन्दु आकार | वास्तविक और उल्टा |
| वक्रता केन्द्र (C) से दूर | मुख्य फोकस (F) और वक्रता केन्द्र (C) के बीच | छोटा | वास्तविक और उल्टा |
| वक्रता केन्द्र (C) पर | वक्रता केन्द्र (C) पर | समान आकार | वास्तविक और उल्टा |
| वक्रता केन्द्र (C) और मुख्य फोकस (F) के बीच | वक्रता केन्द्र (C) से दूर | बड़ा (विवर्धित) | वास्तविक और उल्टा |
| मुख्य फोकस (F) पर | अनन्त पर | असीमित रूप से बड़ा अथवा अत्यधिक विवर्धित | वास्तविक और उल्टा |
| मुख्य फोकस (F) और ध्रुव (P) के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा (विवर्धित) | आभासी और सीधा |
उत्तल दर्पण के द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना (Image formed by Convex Mirror)
जब वस्तु अनन्त पर हो
इस स्थिति में, हम वस्तु से चलने वाली दो किरणों पर विचार करते है जो कि मुख्य अक्ष के समान्तर चलती हुई दर्पण के परावर्तक तल से टकराती है और टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर मुख्य फोकस (F) से आती हुई प्रतीत होती है। इस प्रकार ये किरणें दर्पण के मुख्य फोकस (F) पर वस्तु के प्रतिबिम्ब का निर्माण करती है जो कि अत्यधिक छोटा, बिन्दु आकार का, आभासी और सीधा बनता है।

जब वस्तु अनन्त और ध्रुव (P) के बीच हो
इस स्थिति में, हम वस्तु से चलने वाली दो किरणों पर विचार करते है जिनमें एक मुख्य अक्ष के समान्तर चलती हुई दर्पण के परावर्तक तल से टकराती है और टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर मुख्य फोकस (F) से आती हुई प्रतीत होती है जबकि दूसरी दर्पण के परावर्तक तल पर लम्बवत टकराती है और टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर उसी मार्ग में वापस लौटती हुई, वक्रता केन्द्र (C) से आती हुई प्रतीत होती है। जब ये किरणें दर्पण के परावर्तक तल से टकराती है तो टकराने के पश्चात् दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच वस्तु के प्रतिबिम्ब का निर्माण करती है जो कि छोटा, आभासी और सीधा बनता है।

वस्तु की स्थिति |
प्रतिबिम्ब की स्थिति |
प्रतिबिम्ब का आकार |
प्रतिबिम्ब की प्रकृति |
| अनन्त पर | फोकस (F) पर, दर्पण के पीछे | अत्यधिक छोटा, बिन्दु आकार | आभासी और सीधा |
| अनन्त और ध्रुव (P) के बीच | ध्रुव (P) और फोकस (F) के बीच, दर्पण के पीछे | छोटा | आभासी और सीधा |
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